ev चार्जिंग स्टेशन कॉस्ट : खर्च, कमाई & 5 जरूरी सच्चाई फुल गाइड

इलेक्ट्रिक वाहन की बढ़ती मार्केट को देखकर बहुत सारे लोग खुद का ईवी चार्जिंग स्टेशन का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें प्रॉपर नॉलेज ना होने के कारण कुछ ना कुछ गलती कर बैठते हैं। इसके कारण उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ता है क्योंकि बहुत सारे लोगों को लगता है कि ev चार्जिंग स्टेशन कॉस्ट सिर्फ चार्जर तक सीमित है, जबकि सच्चाई तो यह है कि इसमें इंस्टॉलेशन, बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर, सॉफ्टवेयर, मेंटेनेंस, सरकारी अनुमति और कई छुपे हुए खर्च शामिल होते हैं।

तो अगर आप भी भारत में ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाने की वास्तविक लागत जानना चाहते हैं, कमाई की सच्चाई और सरकारी सब्सिडी का पूरा सच जानना चाहते हैं, तो ये गाइड आपके लिए है बिना झूठे वादे और बिना अधूरी जानकारी के।

Table of Contents

ev चार्जिंग स्टेशन कॉस्ट क्या होती है?

ev चार्जिंग स्टेशन कॉस्ट का मतलब सिर्फ चार्जिंग मशीन नहीं होता है, बल्कि इसमें कई सारे अन्य खर्च जुड़ते हैं, जैसे चार्जर की लागत, इंस्टॉलेशन और सिविल वर्क, बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर, सॉफ्टवेयर सिस्टम, मेंटेनेंस और कई बार जमीन किराये का खर्च भी शामिल होता है। कई सारे नए स्टार्टअप सिर्फ चार्जर की लागत को जोड़कर काम शुरू कर देते हैं लेकिन उन्हें बाद में समझ आता है कि असली खर्च उसके के बाद शुरू होता है। यही कारण है कि ईवी चार्जिंग स्टेशन बिजनेस में फेलियर शुरुआती स्तर पर ज्यादा होते हैं।

भारत में इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन लगाने के प्रकार

भारत में इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन के मुख्य प्रकार को लोकेशन के हिसाब से तीन भागों में बांटा जा सकता है।

होम ईवी चार्जिंग स्टेशन

घर पर ईवी चार्जिंग स्टेशन की स्थापना खासकर निजी उपयोग के लिए कराई जाती है। इसमें कम क्षमता वाले AC चार्जर का उपयोग किया जाता है। इस चार्जर को लगाने का उद्देश्य पैसा कमाना नहीं होता है बल्कि सुविधा होता है। इसकी लागत कम होती है लेकिन कमाई की संभावना भी नहीं होती है।

कमर्शियल EV चार्जिंग स्टेशन

कमर्शियल ईवी चार्जिंग स्टेशन ज्यादातर मॉल, होटल, ऑफिस, पार्किंग एरिया और रेजिडेंशियल सोसाइटी में लगाए जाते हैं। यहीं से कमाई के लिए असली बिजनेस शुरू होता है। सही लोकेशन पर अगर यह मॉडल है तो यह मॉडल sustainable बन सकता है।

हाईवे फास्ट चार्जिंग स्टेशन

हाईवे पर लगाए जाने वाले ev चार्जिंग स्टेशन कॉस्ट महंगे होते हैं क्योंकि इसमें हाई कैपेसिटी DC फास्ट चार्जर का उपयोग किया जाता है। इसके साथ भारी बिजली कनेक्शन की आवश्यकता होती है। यह मॉडल सिर्फ उन्हीं के लिए है जिनके पास बड़ा बजट और लंबी सोच है।

ev चार्जिंग स्टेशन कॉस्ट किन चीज़ों पर निर्भर करती है

ev चार्जिंग स्टेशन कॉस्ट कई चीजों पर निर्भर करती है; इसमें से किसी एक चीज को इग्नोर करना भारी पड़ सकता है।

चार्जर का प्रकार (AC बनाम DC)

AC चार्जर सस्ते होते हैं लेकिन चार्जिंग स्पीड धीमी होती है, जबकि DC फास्ट चार्जर महंगे होते हैं लेकिन चार्जिंग तेज होती है। यही कारण है कि DC चार्जर का प्रारंभिक निवेश ज्यादा होता है।

चार्जिंग कैपेसिटी (kW)

चार्जर की कीमत kW पर भी निर्भर करती है। जैसे-जैसे चार्जर की kW की क्षमता बढ़ती है, तो लागत भी बढ़ती है। 3.3kW और 60kW की कीमत में बहुत अंतर है।

लोकेशन और बिजली कनेक्शन

शहर, हाईवे या ग्रामीण क्षेत्र—हर जगह बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर और DISCOM चार्ज अलग होते हैं। कई बार ट्रांसफॉर्मर लगवाना सबसे बड़ा खर्च बन जाता है।

भारत में EV चार्जिंग स्टेशन लगाने की लागत

ev चार्जिंग स्टेशन कॉस्ट समझने के लिए सभी खर्च अलग-अलग से देखना जरूरी है क्योंकि कुल लागत चार्जर की कीमत से कहीं ज्यादा है।

AC और DC चार्जिंग मशीन की कीमत

भारत में ev चार्जिंग स्टेशन कॉस्ट का सबसे बड़ा हिस्सा चार्जिंग मशीन होता है। AC चार्जर की कीमत 3.3kW के चार्जर के लिए लगभग ₹55,000 से शुरू होती है। और 7.4kW AC चार्जर की बात की जाए तो लगभग ₹1.5 लाख तक हो सकती है। वहीं 11kW और 22kW AC चार्जर की कीमत आमतौर पर ₹2 लाख से ₹3.5 लाख के बीच होती है। वही अगर DC चार्जर की कीमत देखी जाए तो AC के मुकाबले बहुत महंगी है। 30kW DC चार्जर की कीमत लगभग ₹6–8 लाख, 60kW चार्जर ₹10–14 लाख और 120kW या उससे अधिक क्षमता वाले DC चार्जर ₹18 लाख से ₹35 लाख तक पहुँच जाते हैं।

इंस्टॉलेशन और सिविल वर्क की लागत

ईवी चार्जिंग स्टेशन खोलने के लिए चार्जिंग मशीन के साथ-साथ इंस्टॉलेशन और सिविल वर्क का खर्च भी जुड़ता है, जिसे ज्यादातर लोग कम बताते हैं। इसमें फाउंडेशन, वायरिंग, केबल ट्रे, अर्थिंग, पैनल और सेफ्टी सिस्टम शामिल होते हैं। AC चार्जर के लिए इंस्टॉलेशन और सिविल वर्क की लागत लगभग ₹30,000 से ₹80,000 तक होती है, जबकि DC फास्ट चार्जर में यह खर्च बढ़कर ₹1.5 लाख से ₹4 लाख तक जाता है, खासकर जब लोकेशन हाईवे या ओपन पब्लिक एरिया हो।

सॉफ्टवेयर और चार्जिंग मैनेजमेंट सिस्टम खर्च

कमर्शियल ईवी चार्जिंग स्टेशन के लिए सॉफ्टवेयर और चार्जिंग मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) जरूरी होता है। इसमें मोबाइल ऐप, पेमेंट गेटवे, रिमोट मॉनिटरिंग और यूज़र मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इन सभी का सालाना खर्च लगभग ₹12,000 से ₹30,000 होता है, लेकिन यह स्टेशन के साइज और नेटवर्क पर निर्भर करता है।

कुल EV चार्जिंग स्टेशन लागत कितनी आती है?

ईवी चार्जिंग स्टेशन खोलने में आने वाले पूरे खर्च की बात की जाए तो यह पूरी तरह आपकी लोकेशन, चार्जर के प्रकार, चार्जर किलोवाट और आप अपने स्टेशन पर कितने चार्जर लगाना चाहते हैं इस पर निर्भर करता है। वैसे आमतौर पर AC चार्जिंग स्टेशन खोलने की कुल लागत लगभग ₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक आती है, वहीं DC फास्ट चार्जिंग स्टेशन की कुल लागत ₹15 लाख से ₹40 लाख तक पहुँच सकती है। यही वजह है कि ईवी चार्जिंग स्टेशन खोलने से पहले ev चार्जिंग स्टेशन कॉस्ट प्लानिंग और लोकेशन स्टडी बेहद जरूरी होती है।

इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन पर सरकारी सब्सिडी

PM E-DRIVE योजना क्या है

ईवी चार्जिंग स्टेशन खोलने के लिए सब्सिडी PM E-DRIVE के तहत दी जाती है। इस योजना का उद्देश्य ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना है। यह सब्सिडी सीधे तौर पर नगद राशि में नहीं मिलती है बल्कि राज्यों और सरकारी परियोजनाओं के माध्यम से इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देती है।

राज्य सरकार की भूमिका

कई राज्य बिजली शुल्क में छूट, लाइसेंसिंग में राहत और जमीन से जुड़े फायदे देते हैं। लेकिन हर राज्य की नीति अलग होती है, इसलिए बिना जाँच के किसी भी सब्सिडी पर भरोसा करना गलत है।

EV चार्जिंग स्टेशन से कमाई कितनी हो सकती है?

ईवी चार्जिंग स्टेशन से कमाई आपके डेली ट्रैफिक पर निर्भर करती है। औसतन चार्जिंग रेट ₹6–12 प्रति यूनिट है, तो एक स्टेशन 100–150 यूनिट दिन का चार्ज करता है, तो महीने की कमाई ₹18,000 से ₹50,000 तक हो सकती है। हाई ट्रैफिक वाले एरिया में ज्यादा उपयोग के कारण कमाई और भी बढ़ सकती है, लेकिन यह पूरी तरह आपकी लोकेशन पर निर्भर करती है और आपके डेली ट्रैफिक पर।

क्या EV चार्जिंग स्टेशन लगाना फायदे का सौदा है?

ईवी चार्जिंग स्टेशन का बिजनेस उन लोगों के लिए सही है जो लॉन्ग टर्म प्लानिंग के साथ तैयार हैं क्योंकि यह अभी एक स्लो ग्रोथ बिजनेस है। यह उन लोगों के लिए नहीं है जो इसे शॉर्ट टर्म पैसा छापने की मशीन समझते हैं। सही लोकेशन, सही चार्जर और धैर्य हो तो यह फायदे का सौदा बन सकता है, वरना नुकसान तय है।

नए लोग EV चार्जिंग स्टेशन में कौन-सी गलतियाँ करते हैं

  • बिना डिमांड स्टडी के DC चार्जर लगाना
  • सिर्फ सरकारी सब्सिडी के भरोसे बिज़नेस शुरू करना
  • ROI को unrealistically जल्दी मान लेना

इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन शुरू करने से पहले

लोकेशन, बिजली क्षमता, बजट, सरकारी अनुमति और long-term cash flow—इन पाँचों पर clarity के बिना EV चार्जिंग स्टेशन शुरू करना सीधी मूर्खता है।

निष्कर्ष

अभी के समय में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन लगाना आसान है क्योंकि इसके लिए अभी कोई लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन ज़्यादातर लोग सिर्फ चार्जर की कीमत देखते हैं, जबकि असली खर्च बिजली कनेक्शन, इंस्टॉलेशन, सॉफ्टवेयर और मेंटेनेंस में आता है। भारत में ev चार्जिंग स्टेशन कॉस्ट और कमाई पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि लोकेशन सही है या नहीं और चार्जर का चुनाव लोकेशन के हिसाब से समझदारी से किया गया है कि नहीं।

इसलिए बिना डिमांड देखे जल्दी कमाने के चक्कर में शुरू किया गया बिजनेस से नुकसान होना तय हो जाता है। लेकिन जो लोग सही प्लानिंग, धैर्य और लंबे समय की सोच के साथ शुरू करते हैं, उनके लिए भविष्य में यह अच्छे कमाई का साधन बन जाता है।

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