ईवी फास्ट चार्जिंग और स्लो चार्जिंग: कौन सही है? 5 अहम फर्क

इलेक्ट्रिक वाहन जिस स्पीड से मार्केट में फैल रही है, वैसे-वैसे ईवी यूजर्स का सबसे बड़ा सवाल आ रहा है कि ईवी फास्ट चार्जिंग और स्लो चार्जिंग में क्या अंतर है और कौन सी चार्जिंग ईवी के लिए सुरक्षित है क्योंकि बहुत सारे ईवी उपयोगकर्ता को लगता है कि फास्ट चार्जिंग जल्दी चार्ज कर देती है और यही ठीक है। लेकिन यही सोच आगे चलकर बैटरी लाइफ कम कर देती है और खर्च बढ़ा देती है। ईवी फास्ट चार्जिंग और स्लो चार्जिंग दोनों अलग-अलग परिस्थितियों के लिए हैं, इसलिए यह समझना बहुत जरूरी है कि कौन से चार्जर का कब इस्तेमाल करना चाहिए ताकि ईवी सुरक्षित रहे।

इस लेख में साफ बताया गया है कि फास्ट चार्जिंग कब करनी चाहिए और स्लो चार्जिंग कब करनी चाहिए और कौन सी गलती जो आपकी ईवी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। अगर आप अपनी ईवी को लंबे समय तक सुरक्षित और भरोसेमंद रखना चाहते हैं तो इस लेख को पढ़ना आपके लिए बहुत जरूरी है।

Table of Contents

ईवी चार्जिंग क्या होती है?

ईवी चार्जिंग का मतलब है वाहन की बैटरी को बिजली के द्वारा चार्ज किया जाता है। यह प्रक्रिया जितनी आसान दिखती है उतनी आसान है नहीं। ईवी बैटरी महंगी होती है क्योंकि गाड़ी की पूरी परफॉर्मेंस उसकी बैटरी पर निर्भर करती है। चार्जिंग के दौरान बिजली चार्जर से होकर बैटरी तक पहुंचती है। इसी दौरान रास्ते में स्पीड, तापमान और दबाव तय होते हैं। ईवी चार्जर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: AC और DC चार्जर। यही दोनों चार्जर के तरीके को फास्ट और स्लो चार्जर कहते हैं। यही चीजें हैं जिन्हें यूजर नहीं समझते हैं जिसके कारण उन्हें बैटरी की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

स्लो चार्जिंग क्या है?

स्लो चार्जिंग की तकनीकी परिभाषा

स्लो चार्जिंग को घरेलू चार्जिंग भी कहा जाता है। स्लो चार्जिंग घर और ऑफिस की सामान्य बिजली का इस्तेमाल करके की जाती है। इस चार्जर से चार्जिंग धीरे-धीरे होती है जिससे अंदरूनी तापमान नियंत्रित रहता है। स्लो चार्जिंग से चार्ज करने में समय लगता है ताकि वह ऊर्जा को सही तरीके से संग्रहित कर सके। वही कारण है कि बहन निर्माता इसे सबसे सुरक्षित चार्जर मानते हैं।

स्लो चार्जिंग में कितना समय लगता है?

स्लो चार्जिंग में समय लगता है, लेकिन यह समय व्यावहारिक होता है जब कोई यूजर दिन में या घर में ऑफिस के लिए वाहन इस्तेमाल करता है और रात में गाड़ी खड़ी कर देता है। उस दौरान गाड़ी रात में चार्ज होती है और सुबह तक फिर से तैयार हो जाती है। छोटी बैटरी वाली ईवी को चार्ज होने में 5 से 6 घंटे का समय लगता है, वहीं बड़ी बैटरी वाली ईवी को चार्ज करने में 8 से 10 घंटे का समय लगता है।

यही कारण है कि ज्यादातर यूजर्स धैर्य खो देते हैं और ईवी फास्ट चार्जिंग और स्लो चार्जिंग के मुकाबले फास्ट चार्जिंग की आदत अपना लेते हैं। वहीं आगे चलकर बैटरी की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

स्लो चार्जिंग के फायदे

ईवी स्लो चार्जिंग का फायदा यह है कि स्लो चार्जिंग बैटरी को तनाव में नहीं डालता है। इसी वजह से बैटरी स्लो चार्ज होने के कारण बैटरी की सेल संतुलित रहती है और गर्मी कम पैदा होती है। इससे बैटरी की हेल्थ लंबे समय तक सही रहती है और जल्दी चार्ज खत्म होने की समस्या नहीं होती है। यही चार्जिंग का तरीका बैटरी को भरोसेमंद और किफायती बनाता है। इसलिए ईवी फास्ट चार्जिंग और स्लो चार्जिंग की कंपैरिजन में स्लो चार्जिंग बेस्ट है।

स्लो चार्जिंग के नुकसान

स्लो चार्जिंग का मुख्य नुकसान समय है। अचानक लंबी यात्रा करनी हो या फिर समय की कमी हो, यहां पर स्लो चार्जिंग व्यवहारिक नहीं होती है। लेकिन यह नुकसान परिस्थितिजनक है, न कि तकनीकी गलती, लेकिन लोग इसे हमेशा की गलती मान लेते हैं। ईवी फास्ट चार्जिंग और स्लो चार्जिंग के मुकाबले यहां पर फास्ट चार्जिंग काम आ जाती है। फास्ट चार्जिंग सुविधा है, समाधान नहीं।

ईवी फास्ट चार्जिंग और स्लो चार्जिंग

ईवी फास्ट चार्जिंग क्या है?

फास्ट चार्जिंग की तकनीकी परिभाषा

फास्ट चार्जिंग बैटरी को बहुत ही कम समय में काफी हद तक चार्ज कर देता है, और इस ईवी चार्जिंग की कीमत भी ज्यादा होती है। इसमें हाई पावर बिजली, उच्च क्षमता वाले चार्जर और विशेष केबल का इस्तेमाल किया जाता है। यह प्रक्रिया बहुत शक्तिशाली होती है। यह लंबी यात्रा और इमरजेंसी सेवा के लिए बनाया गया है, न कि रोजाना इस्तेमाल के लिए।

फास्ट चार्जिंग कितनी तेजी से होती है?

फास्ट चार्जिंग से ईवी के चार्जिंग टाइम की बात की जाए तो यह चार्जर किलोवाट और ईवी की बैटरी पावर पर निर्भर करता है। आमतौर पर 30 मिनट से 1 घंटे में बैटरी को 20 प्रतिशत से 80 प्रतिशत चार्ज कर देता है, और 80% के बाद चार्जिंग स्लो हो जाती है ताकि बैटरी को नुकसान न पहुंचे। यही बात यूजर नहीं समझते हैं। बार-बार फास्ट चार्जिंग से बैटरी पर दबाव पड़ता है। इससे बैटरी लाइफ कम हो सकती है। ईवी फास्ट चार्जिंग और स्लो चार्जिंग में फास्ट चार्जिंग तब बेस्ट है जब समय की कमी या इमरजेंसी हो, नहीं तो स्लो चार्जिंग ही सुरक्षित विकल्प है।

फास्ट चार्जिंग के फायदे

ईवी फास्ट चार्जिंग का इस्तेमाल इमरजेंसी के दौरान, लंबी यात्रा के लिए या फिर रास्ते में अचानक चार्ज कम हो जाने पर मददगार साबित होता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि फास्ट चार्जिंग रोजाना इस्तेमाल किया जाए क्योंकि ईवी फास्ट चार्जिंग और स्लो चार्जिंग दोनों के इस्तेमाल की एक सीमा है। जो इसे समझेगा वही अपने ईवी का पूरा फायदा उठाएगा।

फास्ट चार्जिंग के नुकसान

फास्ट चार्जिंग का नुकसान यह है कि फास्ट चार्जिंग में सबसे बड़ा खतरा गर्मी का होता है क्योंकि रासायनिक संतुलन बिगड़ता है। इससे रेंज में गिरावट और चार्ज से जल्दी खत्म होने की समस्या देखने को मिलती है। यही वजह है कि हमेशा फास्ट चार्जिंग का इस्तेमाल करने से बैटरी की उम्र घटती है।

ईवी फास्ट चार्जिंग और स्लो चार्जिंग (सीधी तुलना)

चार्जिंग स्पीड और उपयोग

ईवी फास्ट चार्जिंग और स्लो चार्जिंग: यह दोनों चार्जर के इस्तेमाल की एक सीमा है। फास्ट चार्जिंग लंबी दूरी तय करने के लिए इमरजेंसी के दौरान सुविधाजनक विकल्प है, वहीं स्लो चार्जिंग घर, ऑफिस और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित विकल्प है। फास्ट चार्जिंग जरूरत आधारित विकल्प के लिए बनी है, रोजाना इस्तेमाल के लिए नहीं।

बैटरी लाइफ पर असर

स्लो चार्जिंग से बैटरी ठंडी और स्थिर रहती है, जबकि फास्ट चार्जिंग से बैटरी पर ज्यादा दबाव पड़ता है और बैटरी गर्म हो जाती है। यही चीजें लंबे समय में बैटरी की लाइफ डिसाइड करती हैं। इसलिए चार्जिंग विज्ञान को समझना आपकी ईवी बैटरी लाइफ के लिए बहुत जरूरी है।

चार्जिंग खर्च की तुलना

घर पर ईवी चार्जिंग सस्ती पड़ती है क्योंकि बिजली रेट कम होती है, वहीं फास्ट चार्जिंग में खर्च ज्यादा होता है क्योंकि बहुत सारे अलग-अलग खर्च होते हैं, चार्जर लागत और सेवा शुल्क जुड़ते हैं, जिससे लंबे समय में बहुत पैसे खर्च हो जाते हैं और अक्सर यूजर शुरू में इसे नजरअंदाज कर देते हैं।

बैटरी लाइफ पर ईवी फास्ट चार्जिंग और स्लो चार्जिंग का असली असर

ईवी फास्ट चार्जिंग और स्लो चार्जिंग दोनों चार्जिंग का असर बैटरी पर अलग-अलग होता है। स्लो चार्जिंग ठंडी होती है; इससे चार्जिंग कंट्रोल में रहती है। वहीं, फास्ट चार्जिंग ज्यादा गर्म होती है और बैटरी पर दबाव बढ़ा देती है। यही प्रक्रिया जब बार-बार होती है, तो बैटरी की लाइफ कम होने लगती है। यही कारण है कि समझदार ईवी यूजर्स स्लो चार्जिंग को प्राथमिकता देते हैं।

भारत में ईवी यूज़र के लिए सही चार्जिंग रणनीति

भारत जैसे देश में बिजली की कीमत और चार्जिंग सुविधा अलग-अलग है, जबकि चार्जिंग के लिए एक अच्छी रणनीति अपनाने की जरूरत है। घरेलू ऑफिस और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए स्लो चार्जिंग अपनाना एक अच्छा विकल्प है। फास्ट चार्जिंग सिर्फ जरूरत और लंबी यात्रा तक सीमित रखनी चाहिए। यह रणनीति अपनाने से ना केवल आपकी बैटरी हेल्दी रहेगी बल्कि लंबे समय में पैसे की भी बचत होगी।

निष्कर्ष

ईवी फास्ट चार्जिंग और स्लो चार्जिंग: चार्जिंग का सबसे बेहतर इस्तेमाल आपकी जरूरत है क्योंकि स्लो चार्जिंग में समय ज्यादा लगता है, लेकिन यह ईवी की बैटरी के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है। अगर आपके पास समय है और आप घर, ऑफिस और रोजाना सीमित दूरी तय करते हैं, तो ईवी स्लो चार्जिंग सबसे अच्छा विकल्प है। वहीं, फास्ट चार्जिंग समय की कमी और इमरजेंसी के दौरान इस्तेमाल करना समझदारी है क्योंकि हमेशा फास्ट चार्जिंग का इस्तेमाल करने से आपकी बैटरी लाइफ कम हो सकती है क्योंकि फास्ट चार्जिंग से बैटरी पर ज्यादा दबाव पड़ता है।

सीधे शब्दों में, फास्ट चार्जिंग सुविधा है, समाधान नहीं, क्योंकि ईवी चार्जिंग की असली जरूरत स्लो चार्जिंग है। जो यूजर इस बात को अच्छी तरह समझ लेते हैं, वही अपने ईवी का लंबे समय तक फायदा उठाते हैं।

क्या रोज़ ईवी फास्ट चार्जिंग करना सुरक्षित है?

नहीं। रोज़ फास्ट चार्जिंग करने से बैटरी पर ज़्यादा दबाव पड़ता है और गर्मी बढ़ती है, जिससे लंबे समय में बैटरी की क्षमता कम हो जाती है। रोज़ाना इस्तेमाल के लिए स्लो चार्जिंग ज़्यादा सुरक्षित मानी जाती है।

स्लो चार्जिंग में ईवी को पूरा चार्ज होने में कितना समय लगता है?

स्लो चार्जिंग में समय बैटरी क्षमता पर निर्भर करता है। आमतौर पर ईवी को 5 से 10 घंटे लगते हैं, इसलिए इसे रात में या लंबे समय के पार्किंग के दौरान करना सबसे सही रहता है।

ईवी के लिए फास्ट चार्जिंग कब करनी चाहिए?

फास्ट चार्जिंग का उपयोग लंबी यात्रा, हाईवे ड्राइव या आपात स्थिति में करना चाहिए। रोज़मर्रा की ड्राइविंग के लिए इसे आदत बनाना बैटरी और खर्च दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

Leave a Comment